बंदे मातरम् और मुस्लिम

मेरा निजी विचार है कि मुसलमानों को भारत माता की जय और बंदे मातरम् गाना चाहिए। इसमें कोई बुराई नहीं है। इस्लाम में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है। यह मादरे वतन का हिंदी अनुवाद है। इस्लाम में वतन का बहुत ख़ूबसूरत तसव्वर किया गया है। इससे बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता है। इस्लाम अमन और मोहब्बत का पैग़ाम देता है। इस तरह की तंग ख़याली और तंग नज़री की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। इस्लाम सबको साथ लेकर चलने और सबको बराबर इज़्ज़त देने वाला मज़हब है। माँ की बंदना कहने से मुझे नहीं लगता है कि यह अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना है। अल्लाह पुरे कायनात सृष्टि का रब है किसी मज़हब विशेष का नहीं। क़ुरान में अल्लाह को रब्बूलालमिन और रहमतुल्लिल आलमीन कहा गया है। यह कहाँ से शीरक हो सकता है। इस्लाम में माँ को बहुत दर्जा बुलंद मोकाम दिया गया है। माँ के पैर तले जन्नत है ऐसा कहा जाता है। SHIRK के बिना पर इसकी मुख़ालफ़त तो नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई वजह हो तो प्लीज़ coment करें।

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