CAUSES OF ILLITERACY AMONGST THE MUSLIMS

१. POWERTY
२. BACHON KA JAYADA HONA
३. माडर्न एजुकेशन के प्रति ग़लत नज़रिया की यह इस्लाम से हटा degi
४. Clergi की ग़लत सोच व तबलीग
५. नौकरी नहीं मिलेगी। ऐसी सोच। तालीम को नौकरी से जोड़ कर देखा जाता है।
६. मुस्लिम बहुल इलाक़ों में या मुसलामनो के पास दुनियाबी तालीम के idaron का काम होना है।

BACKWARDNESS OF MUSLIMS

Why the Muslims are backward and worst community of the world?
Answer– First, Allah does not belong only to Miya community.He is not miyan. He is for all human being of the world. He is not only for Muslims.He is for all. Kuran says him RABBUL ALMIN and RAHMTULLILALMIN. But Muslims think Allah is only for Muslims. Muslims had to hate to discoveries and inventions, science, technologies, modernity, modern education. He thought that all these things have been done by Europeans and Americans, but it is not truth, reality is this that all those things have been done by GOD. Christians are only mediums.God have made him mediums. Why God made him mediums not to Muslims? This is serious QUESTIONS. I thinks that they accepted the changes and adopt the modernity, science and technology, modernisation, modern Education, but Muslims did not do so, therefore God did not made him mediums.
Second reason of Muslim backward is the over dependency on ALLAH. It is believed or blind faith of the maximum majority of muslims that ALLAH do every things. Without sweat will of ALLAH nothing happens. कुछ भी नहीं होता। ज़्यादातर मुसलमानों की यही सोच उन्हें strggle करने से रोकती है। ये यही सोच कर बैठ जाते हैं कि अल्लाह की जैसी मर्ज़ी मेरे करने से कुछ नहीं होता। सब कुछ अल्लाह के हाथ में है। अल्लाह जो करेगा वही होगा। ये सोच कहीं न कहीं इंसान को निकम्मा बनाती है जो उसकी ग़रीबी और पिछड़ेपन की वजह बनती है। जब की इस्लाम की teaching ठीक इसके apposit है। इस्लाम मूसलसल continuous जद्दो-जहद और STRUGGLE पैग़ाम देता है। ज़्यादातर लोग इसकी ग़लत ब्याख्या करते हैं।
तीसरे कुछ लोगों की ऐसी सोच है की अल्लाह ग़रीबों मजलूमों और मिशकिनो को ज़्यादा पसंद करता है। ये लोग अल्लाह के ज़्यादा क़रीब होते हैं। मैंने अक्सर तकरीरों में सुना है। बेशक ये सही बात है लेकिन इसका ये हरगिज़ मतलब नहीं है की अल्लाह मालदार और अमीर लोगों को पसंद नहीं करता है। अल्लाह सबको पसंद करता है। उसके क़रीब वही है जो पहरेज़दार है जिसके अंदर तकवा है। इस तरह की सोच भी इंसान को निकम्मा बनाती है।

Islam and Humanity

Allah does not belong only to Miya community. मुस्लिम अल्लाह को मियाँ कहते हैं। क्या अल्लाह की कोई जाति या मज़हब है। बेशक नहीं। He is for all human being of the world. He is not only for Musslims. He is for all. Kuran says him RABBUL ALMIN RAB UL ALMEEN. But Muslims think Allah is only for Muslims. No not at all.

क़ुरान ईसाई और यहूद को भी अल्लाह की औलाद मानता है। इकरआ बिस्म रब्बिकल लजी खलक खलकनल इंसान।

बंदे मातरम् और मुस्लिम

मेरा निजी विचार है कि मुसलमानों को भारत माता की जय और बंदे मातरम् गाना चाहिए। इसमें कोई बुराई नहीं है। इस्लाम में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है। यह मादरे वतन का हिंदी अनुवाद है। इस्लाम में वतन का बहुत ख़ूबसूरत तसव्वर किया गया है। इससे बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता है। इस्लाम अमन और मोहब्बत का पैग़ाम देता है। इस तरह की तंग ख़याली और तंग नज़री की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। इस्लाम सबको साथ लेकर चलने और सबको बराबर इज़्ज़त देने वाला मज़हब है। माँ की बंदना कहने से मुझे नहीं लगता है कि यह अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना है। अल्लाह पुरे कायनात सृष्टि का रब है किसी मज़हब विशेष का नहीं। क़ुरान में अल्लाह को रब्बूलालमिन और रहमतुल्लिल आलमीन कहा गया है। यह कहाँ से शीरक हो सकता है। इस्लाम में माँ को बहुत दर्जा बुलंद मोकाम दिया गया है। माँ के पैर तले जन्नत है ऐसा कहा जाता है। SHIRK के बिना पर इसकी मुख़ालफ़त तो नहीं की जानी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई वजह हो तो प्लीज़ coment करें।

REALITY OF SHAHEEN BAG PROTEST

शाहीन बाग़ ही क्या पुरे मुल्क में और पुरे मुल्क में ही क्या बल्कि पूरी दुनिया में मुस्लिम महिलायें घर की चारदीवारी से निकल कर सड़कों पर अपनी नाराज़गी और ग़ुस्से का इज़हार कर रही हैं। हिंदुस्तान में देखा जाय तो शाहीन बाग़ ही नहीं बल्कि हज़ारों जगह औरतें ख़ासकर मुस्लिम औरतें PROTEST कर रहीं हैं। क्या इसकी असली वजह CAA और NRC ही है? इस पर बहुत संजीदगी से ग़ौर करने की ज़रूरत है। मुझे लगता है कि CAA और NRC मुस्लिम औरतों का घरों से निकल कर सड़कों पर आकर धरना देने और प्रदर्शन करने की फ़ौरी वजह हो सकती है लेकिन इसकी असली वजह कुछ और ही है। मुझे लगता है की इसकी असली वजह मुस्लिम औरतों पर लगाई गयी वह एकतरफ़ा पाबंदी है,शोषण और वह उत्पीड़न है जो सदियों से कभी मज़हब के नाम पर, कभी शरीयत के नाम पर,कभी परदे के नाम पर,कभी तलाक़ के नाम पर, कभी हलाला के नाम पर,कभी फ़तवे के नाम पर, कभी पहनावा के नाम पर किया जाता रहा है। अब इन औरतों को एक ख़ूबसूरत मौक़ा मिल गया है अपने अंदर भरी हुई नफ़रत और नाराज़गी के इज़हार करने का। पहले भी मुस्लिम औरतें अपने ऊपर हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रहीं हैं लेकिन शरीयत और मज़हब के नाम पर उनकी आवाज़ को दबा दिया जाता था। अब ऐसा कोई नहीं कर रहा है। अब कोई नहीं कह रहा है कि औरतों का इस तरह से बे पर्दा होकर सड़क चौराहों और अन्य जगहों पर मर्दों के बीच बैठ कर धरना प्रदर्शन करना शरीयत के ख़िलाफ़ है। बे पर्दगी हो रही है। अब कोई फ़तवा जारी नहीं हो रहा है।
CAA और NRC का बहाना ना होता तो न जाने अब तक क्या क्या हो जाता। कैसे कैसे बयान दिए जाते। फ़तवा जारी हो चुका होता। शरीयत और मज़हब की ब्याख्या करने वालों की लाइन लग गयी होती। अब कोई नहीं बोल रहा रहा है। TV debates में यह बोलने वाले लोग की ” जब अल्लाह ने मुस्लिम मर्दों को अलग अलग बनाया है तो औरतें मर्दों की बराबरी क्यों कर रही हैं।” अब ऐसी सोच के लोग कहाँ है।
सवाल यह उठता है की मुस्तकबिल में जब औरतें अपने हकूक के लिए आवाज़ उठायेंगीं तो क्या तब भी शरीयत और मज़हब के ठेकेदार शरीयत के नाम पर उनकी आवाज़ दबाने की कोशिस करेंगे,m
उनको घर की चारदीवारी में परदे के नाम पर क़ैद करने की कोशिस करेंगे। मुझे लगता है की ऐसे लोग अपनी हरकतों से तो बाज़ नहीं आयेंगे। कोशिस तो ज़रूर करेंगे, मुँह की खायेंगे। ऐसी सोच के लोगों को अब शाहीन बाग़ से सबक़ लेना चाहिये। औरतों की बेचैनी और दर्द को समझना चाहिए। भविष्य में उनके साथ बराबरी का सलूक करना होगा। शरीयत का हवाला दे कर उनके साथ ग़ैर बराबरी का सलूक करना बंद करना होगा। इस मुद्दे पर बहुत संजीदगी के साथ ग़ौर व फ़िक्र करना होगा, वरना जो हो रहा है देख रहें हैं और जो होगा चुप चाप देखना पड़ेगा। ठेकेदारी का ज़माना अब धीरे धीरे ख़त्म हो रहा है।

GOD DOES NOT DISCREMINATE

GOD DOES NOT DISCREMINATE
7. WHY WE Discreminate amongst human beings.? God is omnopotent and omnipresent. There is equality and equal protection before the God.He is for the all followers of different religoin. He does not discreminate amongst the religion.he behaves equilly to all human.there is concreate evidence in the sopport of this statements.He rains for all, he blows air for all, he give sun rays for all, he give water for all,oil for all, natural resources for all,froot for all, grain for all, animal for all, blood are same,body orgain is same,voice is same, weather for all, climate for all,universe for all,ocean, seas,river,mountain,jungle, trees for all,desease and epidemic for all.
God has not made religion, caste,community, cult, Haman has made it, therefore he has discriminated in these things. In the things made by God , there is no discrimination.

जल, जॅगल, जानवर,जमीन को बचावो,
Power is never the property of individual, it belongs to a group and remains in the existence only so long as the group keeps together.
By Hannaha Ar